आकर्षक और मन को मोहने वाले मशहूर सितार वादक अदनान खान के सुर और सार की सांस्कृतिक संध्या की रही जादुई धूम

  • विरासत में रेनू बाला के गढ़वाली गीत पर जमकर झूमे लोग
  • विरासत में चला विश्व विख्यात संगीत के बादशाह उस्मान मीर का अद्भुत जादू
  • सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अरुण कुमार सिंह,अध्यक्ष एवं सीईओ, ओएनजीसी एवं मनीष पाटिल, निदेशक, मानव संसाधन, ओएनजीसी शामिल रहे।

देहरादून । ओएनजीसी के डॉ.भीमराव अंबेडकर स्टेडियम में कल से प्रारंभ हो चुके ऐतिहासिक विरासत महोत्सव में रविवार का दिन बहुत ही खास एवं रोचक होने के साथ-साथ बेहतरीन यादगार रूप में भी रहा, क्योंकि आयोजित हुई विंटेज कार एवं दुपहिया वाहनों की रैली में सात दशक से भी पुराने बुज़ुर्ग वाहन दिखाई दिए । बहुत ही अद्भुत एवं अनमोल होने के साथ-साथ बेहतरीन आकर्षक का केंद्र बने इन वाहनों ने विरासत में अपने जलवे बिखरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी । इस विंटेज कार रैली को टिहरी संसदीय क्षेत्र की सांसद महारानी राज्यलक्ष्मी शाह ने झंडी दिखाकर गंतव्य स्थान की ओर रवाना किया ।


टिहरी संसदीय क्षेत्र की सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह ने कहा कि भारतीय संगीत की दुनिया में “विरासत” की ऐतिहासिक धरोहर वास्तव में विश्व विख्यात है । उन्होंने कहा कि रीच संस्था जिस तरह से पिछले तीन दशकों से विरासत महोत्सव का निरंतर आयोजन करती चली आ रही है, वह वास्तव में बहुत ही प्रशंसनीय एवं सराहनीय है ।


भाजपा की सांसद राज्यलक्ष्मी शाह ने आज सुबह विरासत महोत्सव से शुरू हुई विंटेज कार रैली को झंडी दिखाने से पूर्व अपने विचार व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि विरासत की सांस्कृतिक धरोहर हम सभी के मन हृदय में बसी हुई है । ऐसे आयोजन सदैव होते रहने चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखण्ड की संस्कृति हो या फिर हमारे देश की विविध संस्कृति ही क्यों न हो, इन सभी से हमारे देश की शान विश्व के कोने कोने में बढ़ रही है और यह हमारे लिए गर्व की बात है ।


विरासत का अटूट संगम भारतवासियों के साथ ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर रहा है । इसी ऐतिहासिक रिश्ते को कायम रखते हुए आज विंटेज कार रैली का आयोजन किया गया, जिसमें दशकों पुराने 60 दुपहिया एवं 30 विंटेज कार ने प्रतिभाग करते हुए जलवे बिखेरे । रैली में यूं तो कई पुरानी कारों का प्रदर्शन देखने को मिला तो वही, मुख्य रूप से इंग्लैंड में सन 1942 में निर्मित हुई प्लाई माउथ 1954 मॉडल की अनोखी कार का जलवा तो देखते ही बन रहा था । इस कार के प्रथम ओनर का नाम ए एम झा लेफ्टिनेंट गवर्नर ऑफ दिल्ली रहे ।

इस अद्भुत एवं ऐतिहासिक कार के बाद में दूसरे ऑनर लेफ्टिनेंट कर्नल गुरुबचन सिंह थे, अब वर्तमान में यह कार हिमालय ड्रग कंपनी के चेयरमैन डॉ. एस फारूक के पास है और वहीं इसके ओनर हैं । इसी के साथ सन 1948 की यूएसजे 8577 जीप का भी प्रदर्शन बहुत ही विशेष देखने को मिला । वर्तमान में इसके ओनर सगीर अहमद हैं । बूढ़ी कारों की इसी श्रृंखला में एक अन्य फोर्ड यूएसए 1928 मॉडल की इंग्लैंड में ही निर्मित हुई 350 सीसी पेट्रोल की कार भी बहुत ही ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनी रही । यह कार पहली बार ऑनर के रूप में नई दिल्ली के एसीपी गुरूदत्त भारद्वाज के पास रही और अब डॉ.एस.फारूक के पास है । विरासत की ऐतिहासिक महफिल में आए सैकड़ो लोगों एवं कई शौकीन मेहमानों ने इन बुजुर्ग कारों एवं दुपहिया वाहनों के साथ जमकर सेल्फी एवं फोटोग्राफ लिए । यही नहीं, विंटेज कार रैली में एक ऐसी साइकिल भी चर्चा, आकर्षण एवं कौतूहल का विषय बनी रही जिसका एक पहिया बड़ा एवं उसका पिछला पहिया आकार में बहुत ही छोटा था । यह साइकिल देश की आजादी से पहले की बताई गई है । विंटेज कार रैली में एक प्राइवेट वैन सन् 1972 मॉडल की यूपी 07 के-9034 भी मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र बनी दिखाई दी । दुपहिया वाहनों की श्रृंखला में लैंब्रेटा, वेस्पा, विजय सुपर, लूना, यजदी, बुलेट मोटरसाइकिल के अलावा बजाज के कई ओल्ड मॉडल वाले स्कूटर विंटेज कार रैली में दौड़ लगाने के लिए फर्राटे भरते नजर आए । विरासत महोत्सव की यह अनोखी एवं अद्भुत विंटेज कार रैली को देखने के लिए सैकड़ो लोगों का हूजूम उमड़ा हुआ नजर आया । आज की आयोजित हुई इस विंटेज कार रैली में सांसद महारानी राज्यलक्ष्मी शाह के साथ रीच की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी मुख्य रूप से मौजूद रही ।

विरासत में रेनू बाला के गढ़वाली गीत पर जमकर झूमे लोग

गढ़वाली लोक समूह महानेत्रव संस्था ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

संस्कृति संध्या कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ एवं उत्तराखंड के लोक नृत्य एवं गीत की प्रस्तुतियां हुई । सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अरुण कुमार सिंह,अध्यक्ष एवं सीईओ, ओएनजीसी एवं मनीष पाटिल, निदेशक, मानव संसाधन, ओएनजीसी शामिल रहे। विरासत महोत्सव में आज की शानदार संध्या की शुरुआत रेनू बाला के गढ़वाली गीत के साथ हुई जिस पर श्रोतागण मग्न मुग्ध हो गए । तत्पश्चात् रवाई के गीत की प्रस्तुति भी हुई ।

उत्तराखंड की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाते हुए अजय तिवारी के नेतृत्व में गढ़वाली लोक समूह “महानेत्रव संस्था” पहाड़ों की सच्ची भावना को दर्शाते हुए भावपूर्ण प्रस्तुति दी । यह समूह गढ़वाल की समृद्ध संगीत परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित गायकों और संगीतकारों के एक प्रतिभाशाली समूह को एक साथ पिरोता है। रेनू बाला जी उत्तराखंड की प्रसिद्ध गायिका। उन्होंने गाया, ”पहरो ठंडे पड़ी…” त्रिनेत्र समूह की अगली प्रस्तुति प्रसिद्ध गीत, ” तुआ बेलेना…” पर रमई नृत्य था, प्रदीप बसवाल जी ने पट शैली में गीत गाया, ”हरि हो…”
विरासत के शानदार मंच पर गायकों में रेनू बाला, प्रदीप असवाल और सुनील कोठियाल शामिल रहे, जिनकी मधुर आवाज़ उनके लोक प्रदर्शनों से हर सुर में मानों जान डाल रहे थे। उनके साथ संगीतकारों की एक कुशल टीम वीरेंद्र काला, आयुष सेमवाल, मोंटी मंधवाल, सचिन वर्मा, बृज पंवार, रवि बर्थवाल, साहिल नौडियाल तथा शैलेंद्र ने ढोलक, ऑक्टोपैड, खड़ी ढोलक, हुड़का और कीबोर्ड जैसे पारंपरिक और आधुनिक वाद्ययंत्रों पर दमदार प्रस्तुति देकर सभी का मन, हृदय जीत लिया। गढ़वाली लोकगीत जिनमें “खोली का गणेश”, “चोपाटी”, “थड़िया”, “चौंपला” और “चपेली” शामिल हैं, उनसे विरासत महोत्सव की महफ़िल में चार चांद लग गए । इस बेहतरीन व आकर्षक सांस्कृतिक संध्या की जीवंतता में प्रतिभाशाली महिला कलाकार गुसाईं, सोनम सिंह, स्नेहा उपाध्याय और देविका राणा के साथ-साथ पुरुष लोक कलाकारों में आशीष गुसाईं, जगदीश, पारू और करण शामिल रहे, जो भावपूर्ण नृत्य और गति के माध्यम से पहाड़ों की कहानियों, लय और परंपराओं को जीवंत करते नज़र आए।

आकर्षक और मन को मोहने वाले मशहूर सितार वादक अदनान खान के सुर और सार की सांस्कृतिक संध्या की रही जादुई धूम


संस्कृति संध्या कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति में अदनान खान द्वारा सितार बादन प्रस्तुत किया गया जिसमें अदनान खान ने राग जयजयवंती के साथ अपना गायन शुरू किया, विलम्बित झप ताल में जोड़ झाला के साथ जारी रखा और धृत तीन ताल के साथ समापन किया।
किराना घराने के प्रसिद्ध सितार वादक उस्ताद सईद खान के पुत्र, अदनान ने अपने दादा, स्वर्गीय उस्ताद ज़फ़र अहमद खान के अधीन अपनी प्रारंभिक सितार तालीम शुरू की। वह अपने पिता से इस वाद्य की बारीकियाँ सीखते रहे हैं और अब अपने चाचा उस्ताद मशकूर अली खान से गायकी अंग सीख रहे हैं। प्रतिभाशाली युवा अदनान ने जालंधर में हरबल्लव संगीत समारोह और मुंबई में कल के कलाकार सहित पूरे भारत में कई कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी है। वह अपने अद्भुत कौशल, रागों के कुशल संचालन और तानों की तेज़ गति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। वह दिसंबर 2009 से उस्ताद मशकूर अली खान के अधीन आईटीसी एसआरए में जूनियर स्कॉलर बन गए हैं।
शुभ महाराज ने अदनान खान के साथ तबले पर संगत दी। शुभ महाराज, तबला के दिग्गज पंडित किशन महाराज के पोते और पंडित विजय शंकर के पुत्र, जो एक प्रसिद्ध कथक नर्तक और पंडित बिरजू महाराज के वरिष्ठ शिष्य हैं, इस पीढ़ी के प्रतिभाशाली तबला वादकों में से एक हैं। छोटी सी उम्र में ही उन्होंने अपने दादा पंडित किशन महाराज से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था और औपचारिक रूप से उनके शिष्य बने और इस प्रकार बनारस घराने की अखंड परंपरा में शामिल हुए।
मात्र बारह वर्ष की आयु में, शुभ ने अपना पहला तबला एकल प्रदर्शन दिया और एक बाल प्रतिभा के रूप में उभरे। तब से, उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित मंचों को एकल वादक और प्रख्यात उस्तादों के संगतकार, दोनों के रूप में सुशोभित किया है। अपने गुरु के साथ उन्हें घराने के अन्य दिग्गजों से भी बहुमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनकी कलात्मकता में तकनीकी प्रतिभा के साथ भावपूर्ण अभिव्यक्ति का मिश्रण है, जो उन्हें एक लोकप्रिय संगतकार और एक आकर्षक एकल वादक बनाता है।

विरासत में चला विश्व विख्यात संगीत के बादशाह उस्मान मीर का अद्भुत जादू

दुनिया भर के 25 देशों में अपने संगीत का जादू बिखेर चुके हैं मीर उस्मान
रविवार की संस्कृति संध्या की आखिरी प्रस्तुति उस्मान मीर के नाम रहा जिसमें उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत “शिव समान कोई दाता नहीं…” भजन से की, जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, फिर उन्होंने देशभक्ति गाना वंदे मातरम गाया और इसके साथ उन्होंने लोगों के फरमाइश पर कई अन्य गाने भी गाए । इसके बाद उस्मान मीर के बेटे आमिर ने कुछ हिंदी फिल्मी गाने गाए, जिनका श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया।
उस्मान मीर के संगत में उनके बेटे अमीर मीर, बैंजो – नज़ीर, तबला – अब्दुल, तबला – अरुण, ऑक्टापैड – इरशाद, कीबोर्ड – चंदन, ओरकशन – यूसुफ, ध्वनि संचालक – पीयूष मौजूद रहे।
दुनिया भर के 25 देशों में अपने संगीत का अद्भुत जादू बिखेर चुके उस्मान मीर ने विरासत की महफिल में अपने शानदार संगीत का जलवा इस तरह से बिखेरा कि सभी श्रोतागण मग्न मुग्ध हो कर झूमने को मजबूर हो गए ।


विरासत महोत्सव में आज की बेहतरीन व ताजा तरीन संध्या में गुजरात कच्छ के मशहूर विश्व विख्यात सांस्कृतिक धरोहर कला के धनी उस्मान मीर का संगीत सुनकर श्रोतागण महफ़िल में जमे रहे । वे दुनिया भर के 25 देशों में अपनी शानदार प्रस्तुति देकर विश्व विख्यात हो चुके हैं । उनके पिता प्रसिद्ध तबला वादक थे और गुजराती लोकगीत, भजन और संतवाणी गायकों के साथ संगत करते थे। उस्मान मीर को बचपन से ही संगीत में रुचि थी और उन्होंने कम उम्र में ही अपने पिता से तबला सीखना शुरू कर दिया था । हैरानी की बात यह है कि वे अपनी

किशोरावस्था से ही अपने पिता के साथ लाइव कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने लगे थे।
उन्होंने गुजरात के स्वर्गीय श्री नारायण स्वामी मंदिर में तबला वादक के रूप में अपना करियर शुरू किया। सुर संगीत को लेकर विश्व विख्यात हुए उस्मान मीर के लिए तबला वादन अभी शुरुआती दौर में ही था, क्योंकि उन्हें गायन में ज़्यादा रुचि थी और उन्होंने अपने पिता से सीखना शुरू किया । तत्पश्चात अपने गुरु इस्माइल दातार से उन्होंने प्रशिक्षण लिया। मुख्य बात यह भी है कि उन्होंने मोरारीबापू के आश्रम में तबला बजाना शुरू किया और एक गायक के रूप में उनकी शानदार संगीत की ल यात्रा शुरू हुई।
उस्मान मीर लगभग हर तरह का संगीत,भजन,ग़ज़ल, अर्ध-शास्त्रीय, सुगम, गुजराती-लोक संगीत प्रस्तुत करने में सक्षम हैं। उन्होंने लगभग 58 गुजराती फिल्मों में भी अपनी कला का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए पार्श्वगायन किया है। उस्मान मीर कहते हैं कि उनकी गायकी नुसरत फ़तेह अली ख़ान, मेहंदी हसन, जगजीत सिंह और ग़ुलाम अली ख़ान से प्रभावित है। उस्मान मीर ने संजय लीला भंसाली की फ़िल्म “गोलियों की रासलीला” के लिए अपनी शैली और अपनी ऊँची आवाज़ में एक पुराना लोकगीत गाया, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

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