उत्तराखंड सहित पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं वैवाहिक अपराध

क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया, देहरादून में डिटेक्टिव देव गोस्वामी के खुलासों से दर्शक और विशेषज्ञ चौंके
देहरादून। क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया के तृतीय संस्करण में आयोजित एक विशेष सत्र में उत्तराखंड सहित पूरे भारत में लगातार बढ़ते वैवाहिक अपराधों पर गंभीर, तथ्यात्मक और वास्तविक चर्चा की गई। यह सत्र “एक निजी जासूस की नज़र से वैवाहिक अपराध” विषय पर आधारित था, जिसमें तियानझू इन्वेस्टिगेटिव सर्विसेज के संस्थापक एवं निजी जासूस डिटेक्टिव देव गोस्वामी को बतौर पैनलिस्ट आमंत्रित किया गया।

यह कार्यक्रम राजपुर रोड स्थित एक होटल में संपन्न हुआ, जिसकी संचालनकर्ता (मॉडरेटर) सुप्रसिद्ध लेखिका रूबी गुप्ता रहीं। सत्र के दौरान डिटेक्टिव देव गोस्वामी ने अपने वर्षों के अनुभवों के आधार पर बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वैवाहिक धोखाधड़ी और वैवाहिक अपराधों के मामलों में तेज़ वृद्धि हुई है, और यही स्थिति अब लगभग पूरे देश में देखने को मिल रही है।

डिटेक्टिव देव गोस्वामी के अनुसार, आज वैवाहिक अपराध केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि इनमें फर्जी पहचान, पहले से हुई शादी को छुपाना, झूठी नौकरी व आय का दावा, आर्थिक ठगी, भावनात्मक शोषण, डिजिटल माध्यमों से धोखाधड़ी और योजनाबद्ध विवाह जैसे संगठित अपराध शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत और सुरक्षित माने जाने वाले राज्य भी अब इन मामलों से अछूते नहीं रहे हैं, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

इस सत्र में लोकप्रिय टीवी क्राइम शो “सावधान इंडिया” के निर्देशक अनिरबन भट्टाचार्य भी उपस्थित रहे। डिटेक्टिव देव गोस्वामी द्वारा सुनाई गई वास्तविक वैवाहिक अपराधों की कहानियाँ सुनकर वे भी हैरान और स्तब्ध नज़र आए।
उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ऐसे मामलों को मैंने अपने धारावाहिक ‘सावधान इंडिया’ में भी नहीं दिखाया। मुझे अंदाज़ा नहीं था कि भारत में इस स्तर के संगठित और खतरनाक वैवाहिक अपराध वास्तव में हो रहे हैं।”

उनकी यह प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि ज़मीनी हकीकत, टीवी और फ़िक्शन से कहीं अधिक भयावह होती जा रही है।

अपने संबोधन में डिटेक्टिव देव गोस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह-पूर्व जांच (प्री-मैट्रिमोनियल जांच) पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें सार्वजनिक अभिलेख, व्यवहारिक विश्लेषण और मैदानी सत्यापन के माध्यम से तथ्यों की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य विवाह से पहले सच्चाई सामने लाकर भविष्य में होने वाले बड़े अपराधों, कानूनी विवादों और मानसिक आघात से लोगों को सुरक्षित रखना है।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कानून विशेषज्ञों, सामाजिक शोधकर्ताओं और दर्शकों ने इस सत्र को आंखें खोलने वाला, साहसिक और सामाजिक रूप से अत्यंत आवश्यक बताया। वास्तविक घटनाओं और जमीनी सच्चाई पर आधारित इस चर्चा को श्रोताओं ने खूब सराहा।

क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया का यह सत्र न केवल अपराध साहित्य को नई दिशा देता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि सतर्कता, सत्यापन और जागरूक निर्णय आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं।

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