
देहरादून, 3 जून। वर्ष 2019 में क्लेमेंट टाउन थाने में दर्ज मुकदमे में समाजसेवी रोहित अरोड़ा उर्फ टिंकल अरोड़ा को सात वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है। माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय, देहरादून ने धारा 353, 504 एवं 506 आईपीसी के तहत लगाए गए आरोपों में अभियोजन पक्ष को आरोप सिद्ध करने में असफल मानते हुए टिंकल अरोड़ा को दोषमुक्त कर दिया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में टिंकल अरोड़ा एक महिला को न्याय दिलाने और उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों से मिलने गए थे। इसी घटनाक्रम के बाद उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके चलते उन्हें लगभग सात वर्षों तक न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
माननीय न्यायालय ने अपने विस्तृत निर्णय में पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। न्यायालय ने यह भी माना कि प्रस्तुत साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं थे तथा आरोपों के समर्थन में आवश्यक एवं विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं कराए जा सके। परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
उल्लेखनीय है कि जिस समय यह मुकदमा दर्ज हुआ था, उस समय क्लेमेंट टाउन थाने के प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र रौतेला थे। बाद के वर्षों में उनका नाम केशव थलवाल प्रकरण के दौरान भी सार्वजनिक चर्चा में आया था, जिसमें पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे और मामले ने प्रदेशभर में व्यापक ध्यान आकर्षित किया था। हालांकि टिंकल अरोड़ा के मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय देते हुए अभियोजन पक्ष के आरोपों को सिद्ध नहीं माना और आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
फैसले के बाद टिंकल अरोड़ा ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था और उन्हें भरोसा था कि सत्य एक दिन अवश्य सामने आएगा। उन्होंने कहा कि सात वर्षों तक चले इस मुकदमे ने उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने न्याय व्यवस्था पर अपना विश्वास कभी नहीं खोया।
टिंकल अरोड़ा ने अपने अधिवक्ता Deepak Gupta का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सूझबूझ, कानूनी विशेषज्ञता और प्रभावी पैरवी के कारण न्यायालय के समक्ष सच्चाई स्थापित हो सकी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास रखने वाले हर नागरिक की जीत है।
टिंकल अरोड़ा ने कहा, “सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास था और आज न्यायालय के फैसले ने उस विश्वास को और मजबूत कर दिया है। सात वर्षों बाद मिला यह न्याय मेरे लिए सम्मान और सत्य की जीत है।”
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